Stop-loss Order क्या है? Stop-loss Order vs Stop-limit Order

 


महान इनवेस्टर वॉरेन बफेट अक्सर कहते हैं कि आपको इनवेस्टिंग करते समय दो रूल जरूर फॉलो करने चाहिए। पहला रूल है, never lose your money और दूसरा रूल है never forget rule number 1. यानी कि इनवेस्टिंग और ट्रेडिंग के गेम में हम लंबे समय तक तभी सरवाइव कर पाएंगे जब हम हमारी कैपिटल को बचा पाएंगे। और हमारी कैपिटल को बचाने के लिए आप Stop-loss Order का यूज कर सकते हैं।

तो आज के इस पोस्ट में हम यही डिस्कस करेंगे कि Stop-loss Order क्या है और इसका यूज करके इनवेस्टर्स अपने रिस्क को कैसे मिनिमाइज कर सकते हैं।

Stop-loss Order क्या है?

Stop-loss Order एक ऐसा ऑर्डर होता है जिसे लगाने के बाद जब स्टॉक एक सर्टेन प्राइस को टच करेगा तो स्टॉक ऑटोमैटिकली सेल हो जाएगा। जब स्टॉक प्राइस इस प्राइस को टच करता है तो इमीडिएटली एक माकेर्ट ऑर्डर एग्जिक्यूटिव होता है और हमारा स्टॉक सेल हो जाता है।

फॉर एग्जाम्पल मानिए की एक इनवेस्टर 25 rs पर शेयर के प्राइस पर कोई शेयर बाय करता है। वो इन्वेस्टर अपने इस इनवेस्टमेंट पर 5 rs पर शेयर से ज्यादा का लॉस बियर नहीं करना चाहता। तो वो निवेशक 20 rs per share पर Stop-loss Order लगा सकता है।

आप जैसे ही स्टॉक की प्राइस 20 per पहुंचेगी वो शेयर ऑटोमैटिकली सेल हो जाएगा। जब भी प्राइस बहुत तेजी से fluctuat होते हैं तो उस केस में स्टॉप लॉस ऑर्डर आपके लिए बहुत ज्यादा हेल्पफुल हो सकता है।

अब हमने ये तो सीख लिया कि Stop-loss Order क्या है और इसे क्यों यूज करते हैं लेकिन जब भी स्टॉप लॉस ऑर्डर की बात आती है तो अक्सर इनवेस्टर्स उसे स्टॉप लिमिट ऑर्डर के साथ कन्फ्यूज कर लेते हैं। वैसे इन दोनों ऑर्डर्स का purpose ek जैसा ही है लेकिन दोनों में एक छोटा सा डिफरेंस है।

Stop-loss Order और Stop-limit Order के बीच अंतर

जैसा कि हमने पहले डिस्कस किया था कि Stop-loss Order में जब स्टॉक प्राइस ट्रिगर प्राइस को हिट करता है तो उसे टाइम माकेर्ट ओर्डर एग्जिक्यूटिव होता है और हमारा स्टॉक सेल हो जाता है। इसके विरुद्ध Stop-limit Order में जब स्टॉक प्राइस ट्रिगर प्राइस को हिट करता है तो हमारा सेल ऑर्डर एक मार्केट ऑर्डर के बजाय लिमिट ऑर्डर बन जाता है।

क्या इन दोनों में कुछ डिफरेंस है। जी हां मार्केट ऑर्डर उसी टाइम तुरंत एक्जीक्यूट हो जाएगा जबकि लिमिट ऑर्डर तभी एक एक्जीक्यूट होगा जब स्टॉक प्राइस उस लिमिट प्राइस को क्रॉस करता है।

चलिए इन दोनों ऑर्डर्स को इसी सिंपल एग्जांपल से समझते हैं। जब हमने 20 rs पर एक स्टॉप लॉस लगाया और इसके बाद अगर स्टॉक प्राइस 20 rs रुपए या उससे नीचे जाता है तो हमारा स्टॉक उस टाइम की मार्केट प्राइस पर सेल हो जाएगा। यानी की मन लीजिए अगर स्टॉक प्राइस 25 रुपए से 21 पर जाता है और उसके बाद जस्ट डायरेक्टली 17 रूपए हो जाता है तो हमारा स्टॉक 17 रुपए पर भी सेल हो जाएगा।

लेकिन एक Stop-limit Order के केस में ऐसा नहीं होता है। Stop-limit Order के केस में जब भी स्टॉक प्राइस 20 रुपए से नीचे जाएगा तो हमारा लिमिट ऑर्डर एक्टिव होगा। अगर हमने स्टॉक लिमिट ऑर्डर लगाया है तो यह श्योर कहता है कि स्टॉक 20 रुपए से कम प्राइस पर सेल नहीं होगा या सिर्फ 20 रुपए या इससे ज्यादा प्राइस पर ही सेल होगा। हां ऐसा हो सकता है। स्टॉक प्राइस 20 रुपए से नीचे जाने के बाद वापस 20 को टच ना करें तो, इस केस में लिमिट ऑर्डर एग्जिक्यूशन नहीं होगा।

तो इन दोनों ऑर्डर्स में डिफरेंस यही है कि जब भी स्टॉक प्राइस 20 रुपए से नीचे जाएगा तो स्टॉपलॉस ऑर्डर हमेशा एक्जीक्यूट होगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि स्टॉक लिमिट ऑर्डर हमेशा एक एक्जीक्यूट हो। स्टॉक लिमिट ऑर्डर का मेन पर्पज यही है कि कई बार किसी स्टॉक का प्राइस लिमिट प्राइस से बहुत नीचे गिर जाता है और इनवेस्टर्स उस प्राइस पर सेल करना नहीं चाहते। इन्वेस्टर चाहते हैं कि जब प्राइस इनक्रीज होकर लिमिट प्राइस को टच करे तभी उनका स्टॉक सेल हो तो इस केस में स्टॉक लिमिट ऑर्डर बहुत ही उपयोगी साबित होते हैं।

तो अब हम यह समझ चुके हैं कि स्टॉप लॉस और स्टॉक लिमिट ऑर्डर में क्या डिफरेंस है।

Stop-loss Order के फायदे

अब हम यह समझेंगे कि Stop-loss Order के एडवांटेज क्या हैं।

  • स्टॉप लॉस का सबसे बड़ा बेनेफिट ये है कि ये आपके रिस्क को कम कर देता है और आपको स्टॉक मार्केट में बड़े लॉस से बचाता है।
  • स्टॉप लॉस ऑर्डर का दूसरा बेनेफिट ये है कि इसमें किसी भी प्रकार के इमोशंस अटैच नहीं होते। इनवेस्टर्स कई बार इमोशंस में आकर ये सोचने लग जाते कि अगर स्टॉक को एक और चांस दिया जाए तो हमारा स्टॉक प्रॉफिट में आ जाएगा। लेकिन इस delay के कारण बाद में उनको भारी लॉस का सामना करना पड़ता है। इसलिए स्टॉप लॉस आपको इस इमोशनल अटैचमेंट से बचाता है और आपको सही समय पर स्टॉक से एग्जिट लेने में हेल्प करता है।
  • स्टॉप लॉस का ऑर्डर का तीसरा बेनिफिट ये है कि स्टॉप लॉस ऑर्डर ना सिर्फ आपके लॉस को minimize करने के काम आता है बल्कि स्टॉप लॉस आर्डर की हेल्प से आप अपने प्रॉफिट को लॉक भी कर सकते हैं। मन लीजिए कि आपने कोई स्टॉक 100 रुपये के प्राइस पर बाय किया और फिर उसका प्राइस 150 रुपये हो जाता है। आपको ऐसे एक्सपेक्टेशंस हैं कि उसका प्राइस और ऊपर जा सकता है लेकिन इसके साथ साथ आप इसके प्रॉफिट को भी लॉक करना चाहते हैं। इस केस में आप 140 रुपए पर एक स्टॉप लॉस ऑर्डर लगा सकते हैं। इसके बाद अगर स्टॉक प्राइस नीचे जाता है तो भी आप 40 रुपए का प्रॉफिट earn कर पाएंगे।
  • स्टॉप लॉस ऑर्डर का एक और बेनिफिट ये है कि स्टॉप लॉस ऑर्डर लगाने के बाद आपको अपने स्टॉक्स को एक्टिवली ट्रैक करने की जरूरत नहीं पड़ती।

तो ये थे स्टॉप लॉस ऑर्डर के कुछ बेनेफिट्स।

Stop-loss Order के नुकसान

चलिए अब हम Stop-loss Order और उनके कुछ Disadvantages के बारे में बात करते हैं।

  • इसका सबसे बड़ा डिसएडवांटेज तो यही है कि स्टॉक में आने वाले एक शॉर्ट टर्म फ्लक्चुएशन की वजह से भी आप का स्टॉप लॉस ऑर्डर एक्टिव हो जाएगा और आपका स्टॉक्स सेल हो जाएगा। इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आप किस लेवल पर अपना स्टॉप लॉस सेट कर रहे हैं। फॉर एग्जाम्पल एक एक्टिव ट्रेडर 5% लैवल पर अपना स्टॉप लॉस सेट कर सकता है जबकि एक लांग टर्म इनवेस्टर के लिए ये लेवल फिफ्टी परसेंट या इससे ज्यादा का भी हो सकता है।
  • इसका दूसरा डिसएडवांटेज ये है कि स्टॉप लॉस ऑर्डर की वजह से आपका स्टॉक कम प्राइस पर भी सेल हो सकता है। जैसे हमने एग्जाम्पल में देखा था कि आपका स्टॉक 17 rs पर भी सेल हो सकता है। तो इससे बचने के लिए आप स्टॉक लिमिट आर्डर का भी यूज कर सकते हैं। लेकिन स्टॉक लिमिट आर्डर में एक रिस्क ये है कि कई बार आपका आर्डर एक्जीक्यूट ही नहीं होता।

तो इस प्रकार हमने डिस्कस किया कि Stop-loss Order क्या है और ये इनवेस्टर्स के लिए किस प्रकार से beneficial है। एक स्टॉप लॉस आर्डर आपको भारी लॉस से बचा सकता है और आप सही समय पर स्टॉक से exit ले सकते हैं। इसके अलावा इसके
हेल्प से आप अपने प्रॉफिट को भी लॉक कर सकते हैं। ना सिर्फ इंट्रा डे ट्रेडर्स के लिए बल्कि लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए भी स्टॉप लॉस ऑर्डर बहुत ही उपयोगी है।

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