{5 Reason} क्यों स्मार्ट और मेहनती लोग सफल नहीं होते



दोस्तो, आज हम एक MYTH ब्रेक करने वाले हैं कि लाइफ में सक्सेस सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलती है जो ज्यादा स्मार्ट और हार्ड वर्किंग होते हैं। क्योंकि हम इस बात से टोटली Disagree करते हैं। क्योंकि वर्ल्ड वाइड कई स्टडीज रिसर्चर्स और खुद सक्सेसफुल लोगों ने ये शो की है कि आपको लाइफ में सक्सेस पाने के लिए जरूरी नहीं है कि स्कूल कॉलेज या जॉब में सबसे स्मार्ट और इंटेलिजेंट पर्सन होना चाहिए या आप हार्ड वर्किंग हों तो सक्सेस आपको मिलेगी ही मिलेगी।

अच्छा आपको यह तो पता ही होगा कि निकोला टेस्ला कितने जीनियस और स्मार्ट थे। पर अफसोस इतने स्मार्ट और हार्ड वर्किंग होने के बाद भी उन्हें जीते जी वह सक्सेस कभी नहीं मिली जो वो डिजर्व करते थे और उनकी मौत 86 की एज में गरीबी की हालत में एक न्यू यॉर्क के होटल रूम में हुई। यानि कि जरूरी नहीं है कि आप एक्सट्रीम स्मार्ट और हार्ड वर्किंग हो तो आपको सक्सेस मिलेगी ही मिलेगी और आप अमीर बनोगे।

दुनिया में आज भी कई ऐसे लोग हैं जो स्मार्ट और हार्ड वर्किंग होने के बाद भी जॉब और कॉर्पोरेट में ही फंसे हुए हैं। वहीं आपने ऐसे कई लोगों के बारे में सुना होगा जो ऑर्डिनरी थे स्मार्ट नहीं। लेकिन फिर भी वो लाइफ में आगे जाके सक्सेसफुल और रिच बन जाते हैं। ऐसा सभी ऑर्डिनरी लोगों के साथ नहीं होता और ना ही हर स्मार्ट पर्सन के साथ। क्योंकि असल में आपकी स्मार्टनेस से आपकी सक्सेस डिफाइन नहीं होती।

लेकिन सवाल अब ये आता है कि ऐसा क्यों होता है? सक्सेस सिर्फ स्मार्टनेस और हार्डवर्क से नहीं मिलती तो असल में कैसे मिलती है? वो क्वालिटीज क्या है? क्यों कुछ लोग स्मार्ट और हार्ड वर्किंग होने के बाद भी सक्सेस और वेल्थ अचीव नहीं कर पाते।

तो दोस्तों इसके लिए 5 main result है जो आपके लिए जानना बहुत जरूरी है।

सोचो कि हम हर चीज में अच्छे हैं

जो लोग स्मार्ट और हार्ड वर्किंग होते हैं। उन्हें लगता है कि वो सब कुछ कर सकते हैं बस थोड़ा और हार्ड वर्क करने की जरूरत है। इसीलिए वो कभी किसी एक चीज पर नहीं टिक पाते।

फॉर एग्जाम्पल एक क्लास में दो स्टूडेंट्स है। जिसमें एक स्टूडेंट ने अपने पांचों सब्जेक्ट्स में 85-90 मार्क्स अचीव कर रहे है और वह क्लास का टॉपर भी है और वही दूसरे स्टूडेंट ने अधिकतर सब्जेक्ट्स में पासिंग मार्क्स से भी कम मार्क्स अचीव कर हैं। जबकि वो एक सब्जेक्ट में फेल भी हो गया। पर हां एक सब्जेक्ट ऐसा है जिसमें उसने पूरे हंड्रेड मार्क्स अचीव करे है। क्योंकि वो उसका फेवरेट सब्जेक्ट है और यह सब्जेक्ट कुछ भी हो सकता है लेकिन फिर भी हमारी सोसाइटी जनरली पहले स्टूडेंट को ही ज्यादा फेवर करेगी।

जिससे उस स्टूडेंट को लगेगा कि वो तो लाइफ में किसी भी डायरेक्शन में जा सकता है। वो कोई भी करियर चूज कर सकता है क्योंकि वो हर सब्जेक्ट में अच्छा है और वो जो भी चूज करेगा उसमें वो अच्छा कर ही लेगा और फिर लॉन्ग टर्म में भी उसकी ही मेंटल की बन जाती है। जहां वो दिन रात बहुत मेहनत कर रहा है पर इस दिन लोग किसी भी काम को लॉन्ग टर्म तक नहीं कर पाता।

क्योंकि उसे लगता है कि वो सब में अच्छा है। हां माना कि वो सभी में अच्छा तो है लेकिन वो किसी में भी बेस्ट नहीं हो पाता। जैसा कि अमेरिकन Sylvia Plath का कहना है कि “Perhaps when we find ourselves wanting everything it is because we are dangerously close to wanting nothing”.

वे बड़ा जोखिम नहीं लेते

Amazon के सीईओ जेफ बेजॉस। जो बहुत ज्यादा हार्ड वर्किंग और इंटेलिजेंट है, वह बताते हैं कि वो भी अपनी इन कीमती स्किल्स को एक इन्वेस्टमेंट कंपनी की सेफ और सिक्योर जॉब में वेस्ट कर रहे थे। फिर उन्होंने कुछ सोचा जिसे वो Regret minimization Framework कहते हैं। जहां उन्होंने खुद को 80 की एज में इमैजिन करा जहां वो अपनी लाइफ को पीछे मुड़कर देखें तो उन्हें कोई रिग्रेट यानि के पछतावा ना हो। फिर उन्होंने खुद से सवाल करना शुरू करें कि अगर वो अपनी सिक्योर्ड जॉब को छोड़कर इन्टरनेट जैसी योजनाओं में अपना स्टार्ट अप करेंगे चाहे वो उसमें फ़ैल ही क्यों ना हो जाए।

तो क्या वह 80 की एज में इस बात को रिग्रेट करेंगे तो उन्हें जवाब मिला नो, नहीं। वहीं अगर वो ये रिस्क ना लेकर एक सिक्योर जॉब करते हुए एक एवरेज लाइफ जिएंगे और 80 की एज में पूछेंगे तो उन्हें इस बात का रिग्रेट जरूर होगा कि उन्होंने ये रिस्क नहीं लिया। बस यही बात सोचकर उन्होंने अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया और एमेजॉन की शुरूआत की।

आज आप जानते हैं कि वो कहां पहुंच चुके हैं। जब जेफ बेजोस जॉब करते थे तब भी वो स्मार्ट थे और आज भी वो स्मार्ट हैं। लेकिन फर्क ये किताब उनकी जॉब और कंपनी उनके स्मार्टनेस का फायदा अपने फायदे के उठाती थी, लेकिन जेफ सही टाइम पर समझ गए और वो बाकी स्मार्ट लोगों की तरह एक ट्रैप में नहीं फंसे रहे।

तभी वो आज खुद अपनी स्मार्टनेस का फायदा उठा रहे हैं। जबकि पूरी दुनिया में आज भी वर्ल्ड के ज्यादातर स्मार्ट और हार्ड वर्किंग लोग किसी और के लिए काम कर रहे है। दोस्तो एक कड़वा सच ये है कि जो लोग स्कूल या कॉलेज में स्मार्ट और हार्ड वर्किंग होते हैं उन्हें शुरू से रूल्स फॉलो करने की आदत होती है और जो सेफ एंड सिक्योर है बस वही करने में वो फोकस करते हैं। तभी वो उतने ही ज्यादा कोई भी रिस्क लेने से डरते भी हैं। क्योंकि उनकी फैमिली, उनके फ्रेंड्स इस सोसाइटी को उनसे बहुत एक्सपेक्टेशंस होती है।

उनके स्कूल और कॉलेज की वजह से उनकी एक अच्छी इमेज बन जाती है। जिसको प्रोटेक्ट करने के लिए वो कोई भी रिस्क लेने से डरते हैं और अपनी पूरी लाइफ एक इमेज को कैरी करने में लगा देते हैं। इसीलिए वो आगे जाकर एक Mediocre Life में सेटल हो जाते हैं। जबकि लाइफ में कुछ भी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी करने के लिए आपको कई बार रिस्क लेना बहुत जरूरी होता है। रिस्क से हमारा मतलब है कैलकुलेट रिस्क।

उन्हें लगता है कि उनकी Credentials उनकी सफलता का blueprint है

इंटेलिजेंट लोग जो बहुत मेहनत करके लाइफ में कुछ अचीव कर लेते है, तो वो खुद को उस चीज से तैयार कर लेते हैं। ऐसे लोगों से आपको ये लाइन जरूर सुनने को मिलेगी। मैं इस कॉलेज से हूं तो मैं ये डिजर्व करता हूं, मेरे क्लास में इतने मार्क्स आये थे, मैंने यहां टॉप किया था, मैं इस काम में बेस्ट हूँ, एक्सट्रा एक्सट्रा। अब इनके बाद गलत भी नहीं होती, क्योंकि ये सच में बहुत इंटेलिजेंट होते हैं, बहुत मेहनत भी करते हैं पर ये सिर्फ अपने मार्क्स और स्कूल कॉलेज के नाम पर या परफॉमेंस से सक्सेस को चेज करते हैं जिसमें फिर वो बहुत बुरी तरह फेल भी हो जाते हैं।

खासकर आज के इतने तेजी से बदलते टाइम में जहाँ लास्ट 25 सालों में फिफ्टी परसेंट से ज्यादा न्यू जॉब creat हुई है। आज ही कई हाई डिमांडिंग जॉब्स के लिए कोई फॉर्मल एजुकेशन भी नहीं चाहिए बस आपको स्किल्स आनी चाहिए। इस टाइम में अगर आप अपने credentials को अपनी Success से रिलेट करोगे तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हो। जैसा कि मार्क ट्वेन कहते हैं,” I have never let my schooling interfere with my education.

इसीलिए दोस्तो लाइफ में लड़ने को कभी अपने स्कूल या कॉलेज तक लिमिटेड मत रखो। आप अपने स्कूल के टॉपर थे। इसका मतलब ये नहीं कि आपके पास लाइफ के सभी एरियाज में टॉप करने का सर्टिफिकेट है या स्कूल और कॉलेज में अच्छे नहीं थे तो आप कुछ बड़ा नहीं कर सकते या कॉलेज खत्म होने के बाद आप learning करना बंद कर दोगे। नहीं, बल्कि आपको अपनी पूरी लाइफ एक लर्निंग mindset के साथ जीनी होगी। आपको हमेशा लाइफ का स्टुडेंट बनके रहना होगा। जहां आप हर दिन कुछ न कुछ सीखेंगे। जो असल में आपको सक्सेस दिलाएगा। तभी वॉरेन बफेट भी कहते हैं,” The more you learn, The more you will earn”

वे अपने कम्फर्ट जोन से बाहर नहीं जाते हैं

प्रोफेशनल साइकॉलजिस्ट ये बताते हैं कि एक एनवायरमेंट में लॉन्ग टर्म तक फंसे रहने की वजह से हमारा ब्रेन एक फिक्स्ड माइंडसेट बना लेता है। वह कुछ छोटे लोग पैटर्न्स और बिहेवियर कोई फिक्स कर पाएगा। क्योंकि हमारी लाइफ में कुछ भी नया नहीं हो रहा। इसीलिए हमारे ब्रेन में फिक्स्ड Mindset डेवलप हो चुका है। वह इन सभी चीजों से इतने ज्यादा कम्फर्ट में हो जाता है कि उसे इसके अलावा कुछ भी exite नहीं करता। जिससे हम पूरी लाइफ एक कंजर्वेटिव व्यू के साथ जीने लगते हैं।

जहां कम्फर्ट जोन से बाहर कभी भी ग्रो नहीं कर पाते। इसीलिए जब अधिकतर लोग किसी ऐसी प्राब्लम को फेस करते हैं जो उनके कंफर्ट जोन से बिल्कुल बाहर होती है तो वो उसे सॉल्व नहीं कर पाते या उसे हैंडल करने में उन्हें बहुत ज्यादा टाइम लग जाता है। for example आपने लाइफ में कभी कोई काम नहीं करा। आप स्कूल गए, कॉलेज गए, और पढ़ाई करते गए।

यह सोचते हुए कि जब आप अपनी सारी स्टडीज कंप्लीट कर लोगे तब आप काम करना स्टार्ट करोगे। पर जब आपका एंड गोल काम करना ही था तो आपने खुद को सीधा काम करना क्यों नहीं सिखाया और जब आप रियल वर्ल्ड में एंटर हुए जहां आपके स्कूल कॉलेज से भी बहुत ज्यादा hustle है।

आपको कॉरपोरेट वर्ल्ड की बिल्कुल भी नॉलेज नहीं है। क्योंकि आपने लाइफ में कभी कोई काम ही नहीं करा तो आप कभी सक्सेसफुल नहीं हो पाएंगे। इसीलिए आप जहां भी हों, जो भी कर रहे हों याद रखो कि वो चीज फाइनल नहीं है। आपको कुछ न कुछ नया ट्राय करते रहना चाहिए और अपने आप को इस कंफर्ट जोन से बाहर निकालो और असली दुनिया में आओ जहां कोई कम्फर्ट नहीं है।

वे अपनी क्षमताओं में विश्वास नहीं करते

स्मार्ट पीपल बहुत ज्यादा सेल्फ क्रिटिकल होते हैं। आपने देखा होगा कि जो लोग एग्जाम में सिर्फ 2 मार्क्स कम आने पर भी डिप्रेस्ड हो जाते हैं, जहां हो सकता है कि वो ज्यादा डिजर्व करते हों। इसिलए उन्हें इतना दुख होता है पर कई बार परफेक्शन को चेंज करने में वो ओवर थिंक और सेल्फ डाउट में पड़ जाते हैं। क्योंकि इससे वो अपने बारे में एक नेगेटिव इमेज डेवलप करना स्टार्ट कर देते हैं। जो कि धीरे धीरे उनकी आगे की लाइफ को भी अफेक्ट करने लगती है।

अगर आप किसी रेस में फेल हो गए और अगर आप खुद को ये बोलने लग जाओ I Am Not a Good Runner तो आपका ब्रेन इस बात को एक्सेप्ट करने लगेगा। अब चाहे आप उस रेस में सेकंड आए हों पर फर्स्ट को चेज ना कर पाने की वजह से आप खुद को एक फेलियर समझने लगते हों तो ज्यादातर स्मार्ट लोग इसी मानसिकता से जीते हैं। वो अपनी इंटेलीजेंट को दूसरों से कंपेयर करना स्टार्ट कर देते हैं और सेल्फ डाउट में पड़ जाते हैं। जो कि उनकी सक्सेस को एफेक्ट करने लगता है।

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